क्या आप हर बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम और नाक बंद होने से परेशान हो जाते हैं? क्या एंटीहिस्टामाइन और स्टेरॉयड नेज़ल स्प्रे से कुछ दिन राहत मिलती है, लेकिन फिर वही समस्या लौट आती है? यदि हाँ, तो यह लेख आपके लिए है।
साइनसाइटिस और एलर्जिक राइनाइटिस ऐसी बीमारियाँ हैं जो केवल "लक्षण दबाने" से कभी ठीक नहीं होतीं। इनका मूल कारण प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) की गड़बड़ी है — और यही वह जगह है जहाँ होम्योपैथी सबसे प्रभावी रूप से काम करती है।
डॉ.
साइनस हमारे चेहरे की हड्डियों में खोखली जगहें होती हैं। जब इनमें सूजन और बलगम भर जाता है, तो साइनसाइटिस होता है। इसके मुख्य लक्षण हैं:
एलर्जिक राइनाइटिस में नाक की झिल्ली धूल, पराग, पालतू जानवरों के बाल या फंगस जैसे पदार्थों पर अत्यधिक प्रतिक्रिया करती है। यह साइनसाइटिस का सबसे बड़ा कारण बन सकती है। दोनों अक्सर साथ-साथ पाए जाते हैं।
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पारंपरिक दवाएँ केवल लक्षणों को दबाती हैं — एंटीहिस्टामाइन एलर्जी की प्रतिक्रिया रोकती है, स्टेरॉयड स्प्रे सूजन कम करती है। लेकिन जैसे ही दवा बंद होती है, समस्या वापस आ जाती है।
होम्योपैथिक उपचार इम्युनिटी की अतिसंवेदनशीलता (hypersensitivity) को सुधारता है — यानी जड़ पर काम करता है। डॉ. मीनाक्षी हर मरीज़ की पूरी जीवनशैली, एलर्जन, मौसमी पैटर्न और पारिवारिक इतिहास के आधार पर व्यक्तिगत दवा चुनती हैं।
डॉ. मीनाक्षी श्रीवास BHMS, MD और PhD (Homoeopathy) हैं — और राजस्थान विद्यापीठ HMC&H में Associate Professor भी। उनके मरीज़ राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और विदेश से भी ऑनलाइन परामर्श लेने आते हैं।
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