मौसम और स्वास्थ्य

प्रदूषण से खाँसी, गले में ख़राश और नाक बंद: क्या करें, कब डॉक्टर को दिखाएँ

अक्टूबर से फ़रवरी तक उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता बहुत ख़राब हो जाती है। इसका असर सबसे पहले गले, नाक और फेफड़ों पर दिखता है।

डॉ. मीनाक्षी श्रीवास द्वारा ·

जब हवा में धुआँ और महीन कण (PM2.5) बढ़ जाते हैं, तो कई लोगों को सूखी खाँसी, गले में ख़राश, आँखों में जलन, नाक बंद या छींकें होने लगती हैं। बच्चे, बुज़ुर्ग, अस्थमा, एलर्जी या दिल-फेफड़ों की बीमारी वाले लोग ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

घर पर क्या करें

ख़तरे के संकेत — डॉक्टर को दिखाएँ

  • साँस फूलना, घरघराहट या सीने में जकड़न
  • सीने में दर्द, होंठ या नाख़ून नीले पड़ना
  • तीन दिन से ज़्यादा बुखार
  • बलगम में ख़ून
  • दो हफ़्ते या ज़्यादा से खाँसी — भारत में ऐसी खाँसी में टीबी की जाँच की सलाह दी जाती है
  • छोटे बच्चे में तेज़ साँस चलना, पसलियाँ अंदर धँसना या दूध न पीना

प्रदूषण या एलर्जी या इन्फेक्शन?

आमतौर पर
प्रदूषण से जलनAQI बढ़ने पर बढ़ती है, अंदर रहने पर कम; बुखार नहीं
एलर्जीछींकें, नाक बहना, आँखों में खुजली; धूल-पराग या मौसम बदलने पर
वायरल इन्फेक्शनबुखार, बदन दर्द; परिवार में दूसरों को भी
बैक्टीरियल इन्फेक्शनतेज़ बुखार, गाढ़ा पीला-हरा बलगम, लंबे समय तक — डॉक्टर की जाँच ज़रूरी

होम्योपैथिक देखभाल की जगह

कई लोग डॉक्टर की सलाह और ज़रूरी जाँच के साथ होम्योपैथिक देखभाल भी लेते हैं। होम्योपैथी में "एक बीमारी — एक दवा" नहीं होती; दवा पूरी केस-हिस्ट्री — लक्षण, नींद, भूख, तनाव और सामान्य स्वास्थ्य — देखकर हर व्यक्ति के लिए अलग चुनी जाती है। बार-बार होने वाली एलर्जी, साइनस या खाँसी के लिए कई लोग होम्योपैथिक परामर्श लेते हैं; प्रदूषण से बचाव के उपाय और डॉक्टर की दी दवाएँ साथ में चलती हैं। साइनस पर हिंदी लेख

हर व्यक्ति में इलाज की अवधि और असर अलग होता है, और हर फॉलो-अप पर इसकी ईमानदारी से समीक्षा होती है। डॉक्टर की लिखी कोई भी दवा अपने आप बंद न करें।

डॉ. मीनाक्षी से परामर्श लें। उदयपुर क्लिनिक: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से दोपहर 1 बजे (अपॉइंटमेंट से) और शाम 6 से 9 बजे (बिना अपॉइंटमेंट)। वीडियो कॉल या WhatsApp पर ऑनलाइन परामर्श भी उपलब्ध है।

परामर्श बुक करें →  ·  रूट कॉज़ असेसमेंट शुरू करें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

AQI ज़्यादा होने पर बाहर कम निकलें, N95 मास्क पहनें, भाप और नमक-पानी के गरारे करें, पानी पीते रहें और घर के अंदर धुआँ न होने दें।

साँस फूलना, घरघराहट, सीने में दर्द, तीन दिन से ज़्यादा बुखार, बलगम में ख़ून या दो हफ़्ते से ज़्यादा खाँसी हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।

महीन कणों से ठीक से फ़िट होने वाला N95 मास्क बेहतर बचाव करता है; कपड़े या सर्जिकल मास्क कम बचाते हैं।

कई लोग डॉक्टर की सलाह और ज़रूरी जाँच के साथ होम्योपैथिक देखभाल लेते हैं। असर और अवधि हर व्यक्ति में अलग होते हैं।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, यह चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। होम्योपैथिक उपचार हर व्यक्ति के लिए अलग होता है; असर हर व्यक्ति में अलग होता है और किसी विशेष परिणाम का वादा नहीं किया जाता। अपने डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएँ जारी रखें।

यह भी पढ़ें: साइनस · बच्चों में बार-बार सर्दी · साइनस का होम्योपैथिक इलाज · होम्योपैथी गाइड · हिंदी में सभी पेज

M
Dr. Meenakshi Shriwas
BHMS · MD (Homoeopathy) · PhD (Homoeopathy) · In practice since 2013
Associate Professor & PhD Guide — Rajasthan Vidyapeeth HMC&H